क्या मम्मी-पापा का खेल बिगाड़ रहा है आपके बच्चे को ? (This game is not good for your kids)

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kids playing

समय के साथ ज़माना इतनी तेज़ी से बदल रहा है कि अपने झोकों में वो बच्चों का बचपन उड़ा ले जा रहा है. उम्र से पहले बच्चा बड़ा होने लगा है. 1 साल का होते-होते वो मोबाइल पकड़ना सीख जाता है. आज के पैंरेंट्स भी कुछ इसी तरह के हैं. वो भी बच्चे को झट से बड़ा और मेच्योर होना देखना चाहते हैं. उन्हें ऐसा लगता है कि ऐसा करके उनके बच्चे दूसरों के बच्चे से ज़्यादा स्मार्ट हो जाएंगे, लेकिन वो भूल रहे हैं कि बच्चों का समय से जल्दी बड़ा होना भी कई मुश्किलों का सामना करवाता है. वैसे तो आजकल के बच्चे बहुत से गेम खेलने लगे हैं, लेकिन एख ग्रुप गेम बच्चों में बहुत ही फेमस है. उसका नाम है मम्मी-पापा गेम. इसमें एक बच्चा पापा बनता है और दूसरा मम्मी. आइए, देखते हैं कि कैसे ये गेम आपके बच्चे का बचपन बिगाड़ सकता है.

हू ब हू आपकी नकल

इस गेम के ज़रिए बच्चा बिल्कुल उसी तरह काम करता है जैसे आप लोग. दिनभर वो आप लोगों को देखता है, ऑब्ज़र्व करता है. वो सोचता है कि जिस दिन पूरी तरह से वो आपकी नकल कर पाएगा वो गेम का हीरो बन जाएगा. ये सोच बच्चे को दो तरह से बिगाड़ती है. पहला बच्चे के मानसिक स्तर को इतना गंभीर कर देती है कि वो ख़ुश रहने की बजाय आप लोगों द्वारा की गई वो सारी प्रतिक्रियाएं करने की कोशिश करता है, जिसमें अग्रेशन ज़्यादा होता है. दूसरा वो बचपना भुलाकर बड़ा होने की होड़ में शामिल हो जाता है.

मेच्योरिटी लेवल

बच्चों को बच्चों का गेम ही खेलने दें. भले ही इसके लिए वो घर से बाहर लॉन में ज़मीन पर गिरते-भागते खेलें. इससे उनका एनर्जी लेवल बढ़ता है और बच्चे स्ट्रॉन्ग होते हैं. घर में दोस्तों के साथ ये गेम खेलने से बच्चे का मेच्योरिटी लेवल धीरे-धीरे बढ़ने लगता है, जो उनके लिए ठीक नहीं.

खेल को निजी जीवन में करने का प्रयास

आपने भी कई बार ऑबज़र्व किया होगा कि आपका बच्चा ठीक वैसे ही अपनी डॉल को सुलाता या दूध पिलाता है जैसा उसने आपको करते देखा है. ये उसके लिए ठीक नहीं है. क्या आपको नहीं लगता कि आपका बच्चा समय से पहले वो काम कर रहा है, जिसकी उसे समझ भी नहीं. आए दिन ख़बरों में ऐसे मामले पढ़ने और सुनने को मिलते हैं जब बच्चे बड़ों की हरक़त करते हुए ख़ुद को किसी तरह का नुक़सान पहुंचा लेते हैं या उनका कोई फ़ायदा उठा लेता है.

ग़लत आदतों के आदी

इस तरह के खेल खेलते-खेलते बच्चे कुछ ऐसी आदतें अनजाने में सीख जाते हैं, जिसका उनको मतलब नहीं पता होता. वो नहीं जानते कि वो ग़लत कर रहे हैं या सही. उदाहरण के लिए अगर आपने बच्चों के सामने पार्टनर पर हाथ उठाया या ज़ोर से चिल्लाया, तो खेल में वो इसे दोहराते हैं. उन्हें ऐसा लगता है कि ऐसा करके वो बिल्कुल आपकी तरह हो जाएंगे. उन्हें लगता है कि आप जो भी करते हैं वो सही होता है. ऐसे में आपकी नकल करके वो सही कर रहे हैं.

चोरी की आदत

सुनकर आपको हैरानी होगी, लेकिन ये सच है. ऐसे कई मामले सामने आए हैं. हसबैंड के पर्स से जब आप पैसे निकालती हैं, तो बच्चा आपको देख लेता है. खेल में वो भी ऐसा ही करता है. इतना ही नहीं असल में भी वो आपके पर्स से पैसे निकालता है. ऐसा करने की उसे आदत हो जाती है.  उसे ऐसा लगता है कि जो काम आप कर रही हैं, वही तो वो भी कर रहा है.

झूठ बोलने की आदत

बच्चों के सामने पार्टनर से किसी बात की सफ़ाई देते हुए अगर आप भी झूठ बोल रहे हैं, तो ज़रा बचिए. ऐसा वो बाद में दोहराएगा और आपको बहुत भारी पड़ेगा. आज घर में झूठ बोलेगा बाद में स्कूल में फिर अफने दोस्तों में. इस तरह से उसे आदत हो जाएगी.

अग्रेसिव होना

पार्टनर से किसी बात पर झगड़ना ही है, तो कमरे का दरवाज़ा बंद करके झगड़ें. आपकी इस आदत को बच्चा अपने खेल में उतारता है. अपने साथी खिलाड़ी को मारता है, उस पर चिल्लाता है. जब आप ये सब देखते हैं, तो आप उसे डांटते हैं, लेकिन उसने सीखा आपसे ही है.

इसलिए जितना ज़रूरी हो बच्चे को इस तरह के खेल से दूर रखिए. उन्हें घर में अकेले खेलने मत दीजिए. उन पर अपनी नज़र रखिए. आप सतर्क रहेंगे, तो आपका बच्चा सेफ रहेगा.

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