2017 में 19000 से ज़्यादा लड़कियों के साथ बलात्कार हुआ… ये कैसा भारत बन रहा है?

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भारत में बलात्कार

भारत में बलात्कार- भारत में हर दिन एक नया नारा निकलता है. सरकार तो लड़कियों को लेकर इतने जुमले बनाती है कि पूछिये मत. लेकिन क्या कभी सरकार इस मामले में संज्ञान ली. अगर ली होती तो शायद आज ऐसा आंकड़ा हम सभी के सामने नहीं होते. देश की बेटियों की ऐसी स्थिति… सोचकर ही मन सिहर जाता है. विश्वास नहीं होता कि ये वाही भारत है जहाँ कभी महिलाओं की पूजा होती थी. भारत में बलात्कार के मामले हर दिन हो रहे हैं.

मैं भी कितनी पागल हूँ… पूजा तो आज भी करते हैं सब. नवरात्री पर कन्या पूजा करते हैं, लेकिन उसी कन्या की इज्ज़त लूटने में भी पीछे नहीं रहते दरिन्दे. अगर आंकड़ों को देखें तो बेहद चौंकाते हैं. 2017 में ही 19000 हजार से ज्याद रेप के मामले हुए, जबकि बीते 5 बरस में बच्चों से दुष्कर्म मामलों में 151 फीसदी बढ़ोतरी हुई है यानी हर दिन करीब 55 बच्चे दुष्कर्म का शिकार होते हैं. ये वो हकीकत है जो पुलिस तक पहुंचती है.  ये आंकड़े हैं जो पुलिस थाने में दर्ज हुए हैं, लेकिन कुछ मामले ऐसे भी होते हैं जिनकी कोई सुनवाई नहीं होती. वो पुलिस तक पहुँचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं. भारत में बलात्कार में हर साल बढ़ रहा है.

भारत में बलात्कार

सुनने में आया है कि निर्भया के दोषियों के सजा पर सुप्रीम कोर्ट फिर से फैसला दे सकता है. उनकी सज़ा बरकरार रहेगी या उसमें कोई बदलाव किया जाएगा इस पर आज सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला देगा. कितनी बड़ी बिडम्बना है ये लोग समय के साथ उस दर्द को भी भूल जाते हैं जो ये वहशी उन मासूमों को देते हैं. निर्भया तो इस दुनिया से चली गई, लेकिन उन दरिंदों की सजा पर फिर से बहस होगी और कोर्ट एक बार फिर से उस पर फैसला सुनाएगा. भारत में बलात्कार पर कब कड़ा कानून बनेगा?

वाह रे भारत… मानना पड़ेगा. सिर्फ यहाँ के घरों में ही लड़के और लड़की का भेद नहीं किया जाता बल्कि यहाँ तो पूरे देश में ये भेदभाव चलता है. कैसे जिंदा रहेंगी यहाँ की बेटियां. कब तक यूँ ही इन हवाशियों का शिकार होती रहेंगी बेटियां? इसका जवाब देगा कोई? शायद नहीं…. लोगों के पास इतना सोचने का समय ही कहाँ है. भारत में बलात्कार ऐसे होते हैं.

भारत में बलात्कार- जब लड़कियों के साथ दुर्घटना हो जाती है तब ये देश ज़रूर उन दोषियों के बारे में बार बार सोचता है, लेकिन एक बार भी उस रोती-बिलखती बेटी के बारे में नहीं सोचता, जो बिना किसी कसूर के ही अपनी जिंदगी से रुखसत हो जाती है…. अपनों को यूँ ही अकेला छोड़ वो यहाँ से कहीं दूर चली जाती है…..