क्या ज़्यादा इमोशनल होना बेवकूफ़ी है ? (Don’t Be So Emotional )

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Emotional Fool

इमोशनल यानी भावनात्मक लोगों का फ़ायदा हर जगह लोग उठाते हैं. लोगों को लगता है कि जो लोग भावनाओं से भरे होते हैं, उनमें जल्दी किसी को ना कहने की आदत नहीं होती और आसानी से उनका यूज़ किया जा सकता है. ये बात बिल्कुल सच है. आजकल ऐसे ही लोगों का समाज में समावेश है. जो लोग हद से ज़्यादा इमोशनल हैं, उन्हें बेवकूफ़ मान लिया जाता है और काम निकालने के बाद उन्हें दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल दिया जाता है. 

हाल ही में एक 40 साल की महिला से ये सुनकर की उसके घर में उसके पति और बच्चे उसका फ़ायदा उठा रहे हैं सुनकर मैं दंग रह गई. एक रेप्युटेड फर्म में काम करनेवाली महिला अच्छा कमा लेती हैं, लेकिन उनकी भवनाएं उन्हें अपनों की ही नज़रों में बेवकूफ़ बना देती हैं. पति समय-समय पर उनका यूज़ कर लेता है और बाद में उन्हें कहता है कि तुम कितनी मूर्ख हो.

अब सवाल ये उठता है कि क्या सच में भावनाएं आज के ज़माने में काम नहीं करतीं, क्या अब वो समय चला गया, जब एक-दूसरे के लिए मन में भावनाओं के तुफान हुआ करते थे. सपनें में भी सोचना मुश्किल होता था कि अपने ही फ़ायदा उठाएंगे. इस कलयुग में ऐसे बहुत से उदाहरण देखने को मिल रहे हैं, जो आपके होश उड़ा देंगे. कामकाज़ी महिलाओं के साथ भी ऐसा होता है, जबकि वो समझदार और दुनिया देखनेवाली होती हैं.

एक बैंक में मैनेजर की पोस्ट पर काम करनेवाली मिसेस रुपाली का कहना है कि पहले उन्हें बहुत गर्व महसूस होता था कि वो कामकाजी महिला हैं और परिवार को आर्थिक रूप से मदद करती हैं. धीरे-धीरे रुपाली को ये पता चला कि एक प्राइवेट कंपनी में काम कर रहे उऩके पति अब अपनी जॉब को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, और अपनी सैलरी यूं ही उड़ा देते हैं. पत्नी को भावनात्मक रूप से बेवकूफ बनाकर वो उससे पैसा भी लेते हैं और घर में ख़ुद के मर्द होने का दंभ भी भरते हैं. रुपाली को ये बात समझते कई साल हो गए, लेकिन वो अब कुछ कर नहीं सकतीं. रिश्तों में इस क़दर बंध गई हैं कि अब लोग उन्हें पागल भी कहें, तो वो हंसी-हंसी इसे स्वीकार कर लेंगी.

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ये बात सिर्फ़ कामकाजी महिलाओं तक ही सीमित नहीं है. हाउसवाइफ के साथ ये किस्सा ज़्यादा होता है. उनकी भावनाओं के साथ हर दिन खिलवाड़ किया जाता है. उन्हें घर में कामवाली बाई के बराबर समझा जाता है और घर का हर सदस्य उनका अनादार करने के लिए तैयार होता है. उन्हें भी ये बात पता होती है कि उन्हें इमोशनल ब्लैकमेलिंग के ज़रिए बेहतर तरीक़े से यूज़ किया जा रहा है, लेकिन वो कुछ कर नहीं पातीं.

आज की दुनिया में भवनाओं में बहकर काम करने की ज़रूरत नहीं है. चाहे वो ऑफिस हो या घर, हर जगह आपको सजग होकर रिश्तों को निभाना है और उसके अनुरूप ही काम करना है. अगर आप इस नियम को नहीं सीख पाएंगी, तो लोग आपका यूज़ भी करेंगे और आपको बेवकूफ़ भी समझेंगे.

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